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मूल निवासी

भारत 700 से अधिक विशिष्ट स्वदेशी या जनजातीय समुदायों का घर है, जो इसकी आबादी का 8.6% है। ये जनजातियाँ देश के विभिन्न राज्यों में बिखरी हुई हैं, जिनमें ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में अधिकतम सघनता है। भारत में आदिवासी समुदायों को अक्सर आदिवासी कहा जाता है, जिसका संस्कृत में अर्थ 'मूल निवासी
' होता है। उनकी अपनी अनूठी संस्कृति, परंपराएं, भाषा और जीवन शैली है जो भारतीय समाज की मुख्यधारा से बहुत अलग है। उनकी पारंपरिक प्रथाओं, विश्वासों और जीवन के प्रति दृष्टिकोण उनकी विशिष्ट पहचान में योगदान करते हैं। भारत में जनजातीय समुदाय अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, जिसमें कला, संगीत, नृत्य, त्योहार और शिल्पकला शामिल हैं। कुछ जनजातियाँ अपनी जटिल बुनाई के लिए जानी जाती हैं जबकि अन्य अपने सुंदर लोक नृत्यों के लिए जानी जाती हैं। भारत में अधिकांश आदिवासी समुदाय अपनी आजीविका को बनाए रखने के लिए कृषि, शिकार और सभा पर निर्भर हैं। हालाँकि, समाज में तेजी से बदलाव के परिणामस्वरूप कई जनजातियों ने अपनी भूमि और संसाधनों को विकासात्मक परियोजनाओं के लिए खो दिया है, जिसके कारण उनका विस्थापन, गरीबी और भेदभाव हुआ है। भारत सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों के विकास कार्यक्रमों, वन अधिकार अधिनियम और पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम सहित जनजातीय समुदायों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न नीतियों और योजनाओं को लागू किया है। इन प्रयासों के बावजूद, मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और सतत विकास के मामले में चुनौतियां बनी हुई हैं

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“जोहार” का अर्थ (Johar Meaning)

“जोहार” का अर्थ (Johar Meaning) “सबका कल्याण करने वाली प्रकृति की जय” हैं। इस तरह “जोहार” का अर्थ हुआ – “सबका कल्याण करने वाली प्रकृति की जय” अर्थात “प्रकृति के प्रति संपूर्ण समर्पण का भाव ही जोहार है“।           जोहार

आदिवासी शायरी

गरज उठे गगन सारा, समुद्र छोड़ें अपना किनारा, हिल जाए जहान सारा, जब गूंजे जय जोहार का नारा 

14 एप्रिल डॉ.बाबासाहेबांच्या जयंती / Dr.babasaheb jaynati

 "काही माणसांना आपले वाढदिवस साजरे झालेले आवडतील.माझा वाढदिवस साजरा झालेला मला आवडत नाही. म्हणून मी तरुणांना भगवान बुद्धांचा वाढदिवस साजरा करण्यास सांगितले....बौद्ध धर्म जातीविरहित एकजीनसी समाज रचनेचा पुरस्कार करतो, तर हिंदू धर्म जातीवरच मुख्य अधिष्ठान ठेवतो. "(नवी दिल्ली २ मे. 1950)*  मित्रांनो,आता 14 एप्रिल डॉ.बाबासाहेबांच्या जयंतीची आम्ही तयारी करीत आहोत,मग त्यानिमित्ताने सभा व वर्गणी गोळा करण्याचे आमचे काम चालू झाले असेल.संपूर्ण भारतात 6लाख गावामध्ये बाबासाहेबांची जयंती साजरी केली जाते,एक गावाची सरासरी वर्गणी जर रु 10000/-पकडली तर 6लाख गावाची वर्गणी किती?600000×10000=6000000000/-म्हणजे 6 अब्ज,आणि एवढा प्रचंड पैसा आम्ही बाबासाहेबांच्या जयंती निमित्त आनंद,जल्लोष करण्याकरिता,DJ लावून नाचण्याकरिता,मिरवणुका काढून ,कपाळाला नीळ लावून,दारू ढोसून नाचण्यावर घालवतो. *"चंदे का धंधा बंद करो"* एका शहरांमध्ये एकाच ठिकाणी सगळ्यांनी जमायचं आपला संघ दाखवायचा आहे.संघ/संख्या, ताकत/शक्ती  दाखवायची आहे. एक गाव एकच मिरवणूक काढा भले तुम्ही नंतर किंवा आधी आपल्या आपल्या वार्डामध्ये कार्य...